इक कवि

इक कवि क्या कुछ नहीं कर पाता ??? माँ के पैरों की बिवाइवां महसूस कर पाता प्रेमिका के मुखमंडल में चाँद ढूंढ पाता मीलों की दूरी झट से स्याही ईंधन बन दौड़ाता शुष्क पड़ चुके मरुस्थल में भी उम्मीद के बीज उगाता . घाव देख चींखें आंक पाता हैं मौन में छिपा शोर ढूंढ पाता [...]

तुम्हारा शहर

कभी कभार हम सब किसी शहर के बारे में सिर्फ इतना-सा जानते हैं कि उस शहर में वह शख्स रहता हैं जिससे हमे बेहद प्यार हैं... ----Nimish बनारस का घाट हो तुम प्रिय , तुमसे मिलने के लिए मुझे गंगा होना पड़ेगा❤😃🌸 वइसे भिया द्वारका के लिए कोण सी मेट्रो लाइन आवेगी...🌸

क्षितिज

मेरी प्रिय , तुम्हे पता हैं ?? हमारा जीवन इक सुंदर सीनरी सा है !! सूखकर गिर चुके पत्तो पर शोक मनाने से पूर्व , अपनी मुट्ठियाँ भी तो टटोलों ना , देखों तो , ईश्वर ने तो तुम्हारी दोनों हथेलियों को बीजों से भरा है....😃 ----Nimish ❤ Hope is a good thing , may [...]

वटवृक्ष

कितने ख़ुशनसीब होते मंदिर में लगे वटवृक्ष टहनियों में बंधाएं 'मन्नतों' के रक्षासूत्र बन जाते हैं , ईश्वर और आराधक के मध्य आस्था के जीवंत सेतु . कितने ख़ुशनसीब होते सावित्रियों से घिरे वटवृक्ष बंध जाते हैं कच्चे सूत के धागों से बनते उनकी सदा सुहागन रहने की मजबूत गांठ इक आदर्श नारीत्व के प्रतीक [...]

सरकारी दफ्तर की फाइलें

सरकारी दफ्तरों में धूल खातीं , एक के ऊपर एक लदीं-पड़ी फ़ाइलें कोई मामूली फ़ाइलें नहीं होती वे किसी कृषक के बोरवेल की अनुमति हो सकती या फिर जरूरतमंद मेधावी की लंबित छात्रवृत्ति , किसी विधवा की पेंशन हो सकती , या फिर किसी दिव्यांग की ट्राई साईकिल सरकारी दफ्तरों में धूल खातीं ये फाइलें [...]

स्वप्न पंछी

वो ना , बड़े सपने देखता कैसे सपने ?? फिल्मी पर्दे वाले ?? ना भई यथार्थ क़ी बीज से उत्पन्न हुए सपने तम की बेला में दीप लिए , जीवित सपने शिशु से कोमल , जरठ से प्रौढ़ सपने थोड़ा सा पाजीपन , थोड़ा प्रेमजाम पिएं सपने हां , अब कुछ सपने हक़ीक़त बनते कुछ [...]

निशा (haiku)

लाशों का ढ़ेर लाशों पर 'मत' खेल सियासी षंडत्व . निशा का तिरपाल मानव कृश बेहाल मृत्यु तांडव . शहर बसाया गाँव को क्यों लौटते भोले पांडव ----Nimish Stop criticizing the lockdown - it maybe because of the lockdown that you're alive to read Dr Pranshu poetries 😂😂 Hallelujah 🌸

प्रेम(haiku)

Just wanted to try something new wrote few haiku's ...🌸  सजल नयन उमंग प्रेम की स्मृतियां तुम्हारी . प्रेम में वशीभूत सिसकते तुम बिन प्रेम-प्रतीक्षा . प्रेम ने ओढ़ा  फूलों का दुपट्टा तितली नाराज़  ---Nimish   

मात्राएँ

मात्राओं का कितना महत्व हिंदी में... एक मात्रा ग़लत और भाव बदल जाता हैं ...बाबा कहते है स्वभाव का भी बहुत महत्व life में , हल्की सी चूक रिश्ते बिखर जाते है 😃 मूल स्तम्भ 'प्रकृति' हैं , श्रेष्ठ जीव का कविवर मल से घिर कर भी जो करता सृजन अमृतजल मेल करो उनसे जो [...]

पुनर्जन्म

Again rebirth of thoughts , feeling and myself 🌸 कितना ऊंच नीच जात पात धर्म अधर्म इज्जत प्रतिष्ठा द्वेष और मनमुटाव है इंसानी जीवन में क्यों ??? मेरी प्रिय , अग़र हमने फिर से जन्म लिया तो , प्रेम में वशीभूत 'तितलियों का एक जोड़ा' बनेंगे , या फिर किसी प्याऊ में रखी 'मिट्टी की [...]

जन्मदिन/birthday

प्यारे निमिष , जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये , आशा करता हूँ-तुम हमेशा की तरह शरारत संग अपने संकल्प , अपने सपनों की ओर बढ़ रहे होगे !! इस महामारी के दौर में जब कोई अपना बीमार हो या मर रहा हो , जन्मदिन का ज़श्न कब्रिस्तान में वायलिन बजाने सा लगता हैं ना , क्यों [...]

माँ

इक नन्हा नवसिखियां कवि मुझसा , जो लिखता कम , पढ़ता ज्यादा है ; अपनी पहली दोचार कविताएं माँ को ही समर्पित करता है !! ढूंढता फिरता हर क्षण वो उपमा , वो विशेषण वे शब्द श्रृंगार जिससे मातृत्व भाव को अधिक खूबसूरत दिखलाया जाय ; किन्तु ,भूल जाता है अनभिज्ञ , 'माँ' शब्द ही [...]