दुनिया ‘कुछ’ अजीब सी

हा हा , दुनिया कितनी अजीब सी है , दोस्त…..

किसी की मुट्ठी खाली ,तो किसी को रखने की जगह कम है ,

कोई हिमालय सा शांत-अडिग ,तो कोई आग-बबूला दिनकर सा है ।

कोई धर्म का ज्ञाता यहाँ ,तो कोई नास्तिक बन मद-मस्त फिरे ,

कोई प्रेम में ‘ बुद्ध ‘ यहाँ ,तो कोई प्रेम में बने ‘ बुद्धू ‘ बैठे । ।

.

कुछ पर जिम्मेदारियों का बोझ बहुत, कुछ पंछी सैर-सपाटा है ,

कुछ का पेट ‘भूख’ से बिखले ,तो कुछ की परेशानी ‘मोटापा’ है ।

कितनों का कर्म ही धर्म बना ,कितने ‘ईश्वर’ की खोज में ,

कितनों के पाँव जमीं में घिसते ,कितने हवा-हवाई मौज में है ।।

.

कुछ बनते कीमती शिलालेख यहाँ ,कुछ रद्दी अखबार बने ,

कुछ पीड़ा के स्त्रोत बने ,तो कुछ कष्ट-निवारक बाण बने ।

कुछ का जीवन खुद में बीता,कुछ का समर्पण देखने लायक है ,

कुछ ने मेहनत की राह चुनी ,तो कुछ राहु-केतु के सहारे है ।।

—Nimish 

अपनी रफ्तार से गुजरती ज़िन्दगी के अंतिम स्टेशन की बेंच पर बैठा शख्स आपको सफर की उन बातों को बताएगा जो वह जी आया लेकिन ट्रेन में अभी चढ़ा व्यक्ति सफर की सिर्फ कल्पना बताएगा क्योंकि उसका सफर बाकी है …. 

D_6L6t4XUAEnOBB

 

Advertisements

60 thoughts on “दुनिया ‘कुछ’ अजीब सी

      1. haha he is busy mostly in Farming … I typed this poem😅😅 …he just wrote it on paper and gave it to mee 🤓🤓😛

        No spelling mistakes ,yayyyyyy

        Liked by 3 people

  1. he wrote this in less than 15 minutes …b/w 5 metro stations 😊😊😊 …i was shocked .

    ज्यों ज्यों उम्र बीतती है लेखन में वास्तविकता आ जाती है !! 🙂
    beautiful words humesha ki tarah

    Liked by 3 people

  2. Between the Himalayas and the Heavens lies the High Wire stretching across the polarity of the Rahu and the Ketu. That the young man sees Creation unfold in all its beauty below His feet before He becomes a King. He looks to the Southern Mountains for Husbandmen of Creation. All the while You sit at the feet of your Fathers and watch the trains pass by and listen to words that have no beginning or end.

    Liked by 4 people

    1. hey Ron dada ..what a brilliant comment …. thanks so much 🙂

      Apologies for late reply …im very much occupied these days …so much work load plus father is unwell so unable to give much tym here ….

      how r u ?? How is my lovely Dadi ?? i hope u both are fit n fine and enjoying ur life

      Regards.

      Like

      1. fantastic Dada 🙂
        i’m working on my first book …it is almost 60% done…hope to complete it by the end of the year …with God ,Parents and Elders blessings…Hope 🙂

        Like

  3. सही कहा दुनिया बहुत अजीब हैं, कभी-कभी यहां लोग गायब भी हो जातें हैं 😛😋😀

    Liked by 1 person

  4. अपनी रफ्तार से गुजरती ज़िन्दगी के अंतिम स्टेशन की बेंच पर बैठा शख्स आपको सफर की उन बातों को बताएगा जो वह जी आया लेकिन ट्रेन में अभी चढ़ा व्यक्ति सफर की सिर्फ कल्पना बताएगा क्योंकि उसका सफर बाकी है

    isiliye kaha gaya hai jindgi kabhi khatm nahi hoti………ham mar jaate hain magar hamare anubhav kahi n kahi jinda rahta hai…………Bahut hi khubsurti se likha hai …..lajwab rachna.

    Liked by 4 people

    1. डॉ कुमार विश्वास की पंक्तिया है — कटाक्ष किया है राजनीति पर 🙂

      “जो शिला लेख बनता उसको अखबार बना कर क्या पाया”

      बाकी महाकवि ‘दिनकर’ को भी पढ़ा होगा ही उनकी भी किताब में इसका जिक्र है ।।।

      thanks so much Pragya 🙂

      Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s