कला जोड़ती है

जब बड़े परदे पर 'बच्चन' आता है और कहता है " नाम है शहंशाह ", तो भीड़ का चेहरा अचानक खिल उठता है , लोग भूल जाते है... भूल जाते है - हार घरबार , निराशा अभिलाषा , पाप विलाप , लोभ छोभ और सब कुछ भूल-भुलाकर चंद घंटे उस कला , उस चलचित्र का [...]

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Liebster award 5

Thanks to Subi for nominating me.. directly coming to questions 🙂 1. What is the best thing in you? Ans - So many Things 🙂 but converting ice cubes into water is the best thing I know 🙂 Thanks to almighty. 2. According to you your best post. Promises ( english) https://drnimish.wordpress.com/2019/02/20/promises%f0%9f%92%95/ For my grandparents [...]

सजग रहना पहरेदार

अमावस की रात बीती , किन्तु पूनम का चाँद उगना शेष है ! शत्रु जरूर है लहूलुहान , परन्तु मन में भरे घोर मलिनता द्वेष है  !! . नापाक है पड़ोसी , नापाक इरादों से सन्नद्ध ! आतंक के स्त्रोत से , अमन की अपेक्षा हास्यस्पद  !! . 'घर के भेदी' भी असंख्य , जयचंद [...]

ऐतिहासिक भूल-सुधार !!

अभ्यन्तर में भड़काओ नव ज्वाला , घोर तम में फैले उँजियारा । बंजर भूमि में उगे नव अंकुरित बीज , एक निमिष भी न रहने पाए कलंकित रीत ।। . शस्य श्यामला स्वर्ण भूमि का , लौटे गौरव मान पुनः ... श्रापित तीन सौ सत्तरवीं धारा का , अंत तुरंत सुनिश्चित हो !!! . कीमत [...]

शब्दों का खेल !!

मेरा मानना है - " शब्दों के आविष्कार के उपरान्त ही मनुष्य झूठा हो गया था  " , क्योकि आदमी /humans ही एक मात्र ऐसे जनावर है- जो शब्द बोल पाते , लिख पाते और उसे समझ पाते.......बाकी कोई जानवर कभी देखे हो ?? Calculas सॉल्व करते हुए ? अपनी प्रेमिका के लिए  lub लेटर लिखते [...]

कभी तो तू भी मुझे समझ !!!

और कितना मैं तुझे लिखूं , कभी तो तू भी मुझे समझ ।। मेरी हर नादानियों को तू , इतना मत परख.. मत परख ..इतना मुझे की मै , दूर तुझसे हो जाऊ.. दिल तो दिल कही आँखों से भी , ओझल हो जाऊ.. . कहा-कहा नहीं खोजे थे ?? तूने , इश्क़-प्रेम के मायने [...]

आपकी डॉक्टर बेटी !!

दिन रविवार था, एम्स की परीक्षा देकर मैं Noida मेट्रो में सवार दिल्ली लौट रहा था । खुश था...इसीलिए नहीं की exam बढ़िया गया था ,पर इसीलिए की करीब एक साल बाद घर जा रहा था...माँ के पास । सामने की सीट पर एक बुजुर्ग आदमी बैठे थे... कपडे मटमैले से, बाल बिखरे हुए , जूते [...]

‘बसंत’ आया क्या ??

परसाई जी कहते है --  ' बसंत आता नहीं , लाया जाता है   ' हमारा-आपका जीवन भी तो बिलकुल मौसम की भांति है -- कभी जिंदगी में बसंती हवाएं चलती है , तो कभी पतझड़ की बेला आती , कभी जिंदगी सावन के झूलो से सरपट हो जाती तो कभी जिंदगी बिलकुल बर्फ सी शांत,सफ़ेद चादर [...]