कभी तो तू भी मुझे समझ !!!

और कितना मैं तुझे लिखूं ,

कभी तो तू भी मुझे समझ ।।

मेरी हर नादानियों को तू ,

इतना मत परख..

मत परख ..इतना मुझे की मै ,

दूर तुझसे हो जाऊ..

दिल तो दिल कही आँखों से भी ,

ओझल हो जाऊ..

.

कहा-कहा नहीं खोजे थे ??

तूने , इश्क़-प्रेम के मायने !!

दिमाग के दायरों से बाहर ही…मिलते है 

ये सब तराने !!

इश्क़ होता… पल-भर में ,

पल भर में मिलते..’दो अनजान’ नयन ,

पल भर में बढ़ता हृदय-चाप ,

पल भर में सजते नए स्वप्न ।। 

.

है पारस जितना पाक प्रेम ,

कोई गुना-भाग का सूत्र थोड़ी ।

है नदियों से बहती धार ‘प्रेम’ ,

कोई ‘ठहरा’ हुआ तालाब थोड़ी ।

दिल से होता है इश्क़ भला ,

दिल में ही उठते है …प्रेम ज्वार

दिल में पलते…दिल में बढ़ते 

ये शब्द मेरे

तुमको ,प्रिय प्राण 

.

मै लिखता हु कि….

तू… कभी तो हमको समझे ,

ये प्रेम-इश्क़ की बातो को …

कभी तो दिल से सोचे

कभी तो दिल से सोचे….

—–Nimish 

Thanks to Roma Ji ,My friend from twitter ….She gave me the initial idea about the poem. 

 “I love you from the center of my brain” 

or 

“I love you from the bottom of my heart”. 

 Big Question ????????  haha 🙂 

 

EA1FXM7XUAMOTt-

 

 

 

 

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36 thoughts on “कभी तो तू भी मुझे समझ !!!

      1. प्रेम की पदयात्रा में प्रेम मिलता है, खोता है फिर नया मिल जाता है या खोया हुआ ही वापस लौट आता है 😂😂😂😂😂😂😂😂

        Liked by 6 people

  1. “है पारस जितना पाक प्रेम ,

    कोई गुना-भाग का सूत्र थोड़ी ।

    है नदियों से बहती धार ‘प्रेम’ ,

    कोई ‘ठहरा’ हुआ तालाब थोड़ी ।”

    मूझे यह पंक्तियां बहुत बहुत पसंद आई।
    बढ़िया रचना 👌 👌

    Liked by 7 people

  2. wowwww love those lines
    “है पारस जितना पाक प्रेम ,

    कोई गुना-भाग का सूत्र थोड़ी ।

    are u on instagram???

    Liked by 3 people

  3. वाह दिल को भा गया। लाजवाब लेखन।
    प्रेम दिमाग से नही
    दिल की सुनता है।

    स्थिर हम भी होंगे,
    आज है अल्हड़ता,
    नादानियाँ कर लेने दे,
    कहीं वक्त ना निकल जाए,
    फिर पछताने से क्या होगा?
    वीणा के तार उतना ही खींच की
    संगीत निकले,
    मत खींच इतना,कहीं टूट न जाए,
    फिर नीर बहाने से क्या होगा?
    आज ख्वाहिशें अनंत सजे हैं,
    पाँवों में पंख लगे हैं,
    उड़ लेने दे खुले आसमान में,
    समय बीत जाने के बाद क्या होगा?
    जानते हैं ख्वाहिशें तेरी भी हैं
    उड़ने को,
    मगर डरते हो गिर जाने से,
    पता है प्रेम तुमको भी है
    मगर डरते हो,बिछड़ जाने से,
    उहापोह किश्ती को भंवर में फँसा देते हैं,
    गुना,भाग प्रेम को सौदा बना देते हैं,
    कब थमा है हवा,पानी,वक्त और ये जीवन भी,
    मगर आज,
    सब थम सा गया है,
    परखना जरूरी है
    मगर
    मत परख इतना कि परख भी डर जाए,
    देर ना कर हाथ बढ़ा
    कहीं वक्त ना गुजर जाए,
    देर ना कर हाथ बढ़ा
    कहीं वक्त ना गुजर जाए।।

    Liked by 1 person

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