शब्दों का खेल !!

मेरा मानना है – ” शब्दों के आविष्कार के उपरान्त ही मनुष्य झूठा हो गया था  “ , क्योकि आदमी /humans ही एक मात्र ऐसे जनावर है- जो शब्द बोल पाते , लिख पाते और उसे समझ पाते…….बाकी कोई जानवर कभी देखे हो ?? Calculas सॉल्व करते हुए ? अपनी प्रेमिका के लिए  lub लेटर लिखते हुए ??  क्यों ??

बाकी जानवर भी हमारी तरह ही खेलते-खिलते है , पलते-बढ़ते है , सुख-दुःख में साथ रहते , सम्बन्ध भी बनाते , सम्भोग भी करते ,जरुरत पड़ने पर सहयोग भी करते , उनकी माँ भी हमारी माँ जितना ही अपने बच्चो से प्यार करती , हां बस बाहर निकलने पर काला टीका नहीं लगाती  !! बाकी जानवर सिर्फ शब्द ही तो नहीं बोल पाते ,लिखते-पढ़ते नहीं…..शायद महसूस ज्यादा करते होंगे , क्यों ??  

शायद इसीलिए जानवर झूठ नहीं बोलते ,कपटी नहीं होते , मीठी छुरी नहीं होते , अपनी बात पर अडिग रहते !!उनके लिए शब्द मायने नहीं रखते  …..और शायद इसीलिए प्रेम , सदभाव ,आत्मीयता , वैभव , सौंदर्य , रोमांस फलाना-ढिकाना शब्दों के आबद्ध नहीं , इनको महसूस किया जाता …..शायद !!!!! 🙂

—-Nimish

“Until the Lion Learns How to Write, Every Story will Glorify the Hunter”

EBsqYodWwAEjisA

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39 thoughts on “शब्दों का खेल !!

  1. Nimish …. You Better Translate It And Write It Below … You Can Get New Friends Out Of India…. I got a Friend and We Had a conversation For An Hour In WordPress Yesterday.Please Write In English As Well.

    Liked by 3 people

    1. i write Alternate Hindi English posts brother

      hindi Sarcasm ,anecdotes are difficult to translate in english …..

      work work and work …so very busy these days …. still i will try to … lets seee 🙂
      love u tons

      Liked by 1 person

      1. no other stuffs ….working on my book , plus pappa business i m handling he is not well past few months ..etc etc etc this is no place to tell other stuffs

        u r on twitter??

        Liked by 2 people

  2. wowwwww …hats off 😍☺️
    i dont know how you manage so many things in ur lyf ..
    apun se apni padhai nahi sambhali jaa rahi 😌🙃

    Liked by 3 people

  3. Beautiful last lines…
    आहार निद्राभयमैथूनंच, सामान्यमेतत् पशुभि नराणाम्।
    धर्मो ही एको, तेषामधिको, धर्मेविहीण पशुभिसमानाः।।

    Liked by 3 people

    1. thanks brother … google searched it ….means
      आहार, निद्रा, भय और मैथुन – ये तो इन्सान और पशु में समान है । इन्सान में विशेष केवल धर्म है, अर्थात् बिना धर्म के लोग पशुतुल्य है ।

      seriously i want to learn sanskrit …. from u ..once let me complete college 🙂
      love u tons bro

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  4. प्रेम सभी जीवों में होता है मगर नफरत,छल,धोखा उनमें नहीं होता ये कहना मुश्किल है। क्या पता वे भी तड़पते होंगे तब जब उनका कोई साथी उसे छोड़ किसी और के साथ चल देता होगा। कोई अपना उनसे छीन जाता होगा तब वे भी तड़पते होंगे। भावनाएं उनकी भी उबाल लेती होगी मगर शब्द के बिना बेचारे सिर्फ अश्क बहाकर अपने गम का इजहार कर लेते होंगे।
    जानवरों की भी अपनी भाषा है और शब्द भी जिसे वे समझ लेते हैं।ये अलग बात है कि वे लिख नहीं पाते और हम नहीं समझते। कई जानवर ऐसे हैं जो हमारे शब्दों को समझते हैं और सुनकर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं।

    हम मन से,दिल से झूठे हैं भाई, ये अलग बात है कि दोष हम शब्दों को देते हैं।
    शब्द कर्णप्रिय भी हैं ये अलग बात है कि हम कर्कश शब्दों को चुनते हैं।
    शब्द हंसानेवाले और प्रेम से भरे भी हैं ये अलग बात है कि हम छल,धोखे से भरे शब्द चुनते हैं।

    Liked by 1 person

    1. जानवरों की भी अपनी भाषा है और शब्द भी जिसे वे समझ लेते हैं।ये अलग बात है कि वे लिख नहीं पाते और हम नहीं समझते। कई जानवर ऐसे हैं जो हमारे शब्दों को समझते हैं और सुनकर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं।

      Sahi kahe dada …meri gaay “shyama” humse baat kerti ….aisa mahsoos hota kabhi kabhi 🙂

      Ha apka paksh bhi bilkul sahi ….aapka aur meri baat mila di jae to kuch ek sa niskarsh nikalta hai 🙂 ….

      Aapko nominate kiye hai “quote challenge ” me… likhna padega dada…. 🙂

      Pranaam dada 🙂

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      1. हा हा हा। चैलेंज का नाम सुनते ही शब्द हमें छोड़कर कहीं दूर भाग जाते हैं। फिर भी हमने आपके कॉमेंट्स बॉक्स में जो हो पाया लिख दिया हूँ। धन्यवाद आपका नॉमिनेट करने एवं इस योग्य समझने के लिए।

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