लाहासिल इश्क़ (हास्य)

लाहासिल इश्क़ बड़ा ही क्रांतिकारी होता है , एकदम बवाल !! जिस भी क्षेत्र में घुसता है बिल्कुल चोटी का काम करता है… ऐसा इश्क़ में असफल व्यक्ति जब साहित्य में घुसता है तो– उच्च श्रेणी की काव्य-रचना करता है , सिविल परीक्षा में बैठता है तो सीधा कलेक्टर और कही गलती से लैब – वैब में घुस गया तो भारी-भरकम आविष्कार कर डालता है …..

हमारी बातों को ध्यानपूर्वक सुन रहे हमारे मित्र ‘रामभरोसे’ ने बदहवास होकर पूछा —

भाई हासिल इश्क़ क्या करता है ??

हासिल इश्क़ बाजार में टिंडे खरीदता है , मुफ्त की धनिया के लिए सब्ज़ी वाले से लड़ता है …

मतलब ??

मतलब ये की हासिल इश्क़ की शादी हो जाती ….हा हा हा , मैं चला टिंडे लेने ….. 🙂

—Nimish

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35 thoughts on “लाहासिल इश्क़ (हास्य)

    1. शुक्रिया मित्र ☺☺उत्कृष्ठ पाठकों की टिप्पणियां सदैव ही और बेहतर लिखने और बनने का confidence देती 😊😊

      आभार 😊

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    1. abhi तो हम बच्चे है dada….हम साहित्य भी लिखते और टिनडे भी खरीदते 🤣🤣🤣🤣
      Shukriya daddu ❤❤😊

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      1. 🤣🤣❤ अभी इलाज करने में काफी समय शेष है … सच बताऊँ तो अभी इनजेकसन लगाना भी नही आता … mbbs पूरा करने और specialist banne तक मोदी जी 4 बार प्रधानमंत्री बन जाऐ 🤣🤣🤣🤣

        पढ़ाई में मन नहीं लगता तो कविता में मन लगाता हूँ …सब आप सब का आशीर्वाद है 😊😊🙏❤❤

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