ध्यान !

कितना सहज है..  ध्यान की मुद्रा में आना  ; और कितना जटिल है .. वास्तव में ध्यान लग पाना ; स्पष्ट हैं... सीधी रीढ़ मात्र से , मन के टेढ़ेपन से निजात दुष्कर है ; अंतर्मन में व्याप्त कोलाहल रुपी विष  , कृत्रिम शांति पर अपकर्ष है !!! ----Nimish The life of inner peace, being harmonious and [...]