ध्यान !

कितना सहज है.. 

ध्यान की मुद्रा में आना  ;

और कितना जटिल है ..

वास्तव में ध्यान लग पाना ;

स्पष्ट हैं…

सीधी रीढ़ मात्र से ,

मन के टेढ़ेपन से निजात दुष्कर है ;

अंतर्मन में व्याप्त कोलाहल रुपी विष  ,

कृत्रिम शांति पर अपकर्ष है !!!

—-Nimish

The life of inner peace, being harmonious and without stress, is the easiest type of existence. —Norman Vincent Peale

 

36 thoughts on “ध्यान !

  1. चञ्चलं हि मन: कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् |
    तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् || 6-34||
    The mind is very restless, turbulent, strong and obstinate, O Krishna. It appears to me that it is more difficult to control than the wind.

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    1. यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योगसेवया |
      यत्र चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति ||

      BG 6.20: When the mind, restrained from material activities, becomes still by the practice of Yog, then the yogi is able to behold the soul through the purified mind, and he rejoices in the inner joy….

      Answer to everything geeta🙂🌻❤

      Thanks so much bhai for reading …sometimes I’m read geeta🌻

      Liked by 4 people

      1. 🙏🙏🙏 — ये वाला इमोजी बड़ा खतरनाक है मियां 😂😂 इसका मतलब होता बस बस पका मत 😂😂

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  2. बेहतरीन लाइन है :
    सीधी रीढ़ मात्र से , मन के टेढ़ेपन से निजात दुष्कर है;
    सटीक बात है|  
    पर मुझे लगता है की मात्र सीधे बैठकर  आँखें बंद करके  कुछ समय बिताना  भी लाभ दायक है , शायद यह है ध्यान लग पाने की  नर्सरी कक्षा | इससे मन के टेढ़ेपन से निजात तो शायद ना हो पर स्वयं के अंतर्मन की छवि कुछ अधिक स्पष्ट नज़र आनी शुरू हो जाती है | 

    सीधी रीढ़ से  ही ध्यान करना श्रेयष्कर है
    हाँ!वास्तव में ध्यान  लग पाना  दुष्कर  है
    शायद ना  हो  इससे
    हमारी कृत्रिम  शान्ति का  उत्कर्ष
    पर कभी सीधे बैठ आँखें बंद कर
    ध्यान लगाने का प्रयास करें सहर्ष
    ध्यान आधा अधूरा ही सही  
    पर इसका भी है  कम नहीं महत्व |

    Liked by 3 people

    1. 100% apt

      Well said dhyan ki nursery class

      Shuruwaat 0 se he hoti … Jo bade Yogi hai unhone bhi beginning isi Nursery se ki hogi

      Akele me 5 -10 minute aankhen band kr maun rahna bahut labhdayak hai sach me … कोटा में था तो वहाँ अनुभव किया … हम परफेक्ट नहीं बन सकते पर परफेक्ट के करीब जा सकते

      लोग हर चीज़ में shorcut ढूंडते है अब mostly … मैं बहुत सारे लोगो को जानता हु जो cool स्मार्ट और ज्यादा progressive दिखने के लिए मैडिटेशन , भगवद गीता , योग , संस्कृति , संवाद , और जीवन मूल्यों का मज़ाक उड़ाते ….. और फिर यही so called प्रोग्रेसिव लोग सिगरेट , drugs , डिप्रेशन , hope less आदि की तरफ आकर्षित होते …

      जैसा की आपने बखूबी बताया धयान लगाने का प्रयास करना चाहिए मै मानता हूँ हम चाहे तो क्या नहीं सीख सकते …
      योग हमारी विरासत है … पश्चिमी देशों में योग का बहुत माहौल है .. और भारत अपनी विरासत भूल पश्चिम का ड्रग्स , नशा अपने यहाँ प्रचलन में ला रहा …

      योग , मैडिटेशन जीवन बेहतर बनाता ☺💐💐

      बहुत आभार दा आपका इतने प्यारे कमेंट के लिए , प्रणाम

      आपको ट्विटर पर फॉलो किया ☺

      Liked by 2 people

      1. Twitter पर मै थोड़ा बदमाश बच्चा हूँ 🤓 … आप सीख जाओगे बहुत आसान है … 👍

        Liked by 1 person

  3. A quote from the Bible from the book of Philippians: “ Be anxious for nothing but in all things by prayer and supplication with thanksgiving let your requests be made known to God and the peace of God that passes all understanding shall guard your hearts and minds through Christ Jesus.”

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      1. Aapka स्वास्थ कैसा है … ?? बिमारी के छक्के छुड़ा दिया करो दादु जैसे अमित शाह देश के कानूनी विसंगतियों के छक्के छुड़ा रहे 😍😍❤✨ प्रणाम ☺

        Liked by 2 people

  4. व्यक्ति स्वयं के बनने से बचता और स्वयं को खोजता है यह द्वंद ही बना रहता है शरीर की तिमिर शांति तक !देवदूत की अदावत या यमदूत का भयंकर नाच बस समझ नहीं आता सत्य क्या है जीवन जाता रहता है नई बारी के लिये

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