पाज़ेब

हमारे नाना के हज़ार किस्सों में से एक किस्सा पाज़ेब और स्वर्गवासी नानी को लेकर ❤ जो की मै कभी नहीं भूलता !! कविता के रूप में लिख रहा.

कवि नाना से सवाल जवाब करता हुआ🐒🐵😂

————————

यक्ष प्रश्न उठता है कि ,

पुरुष जीवन में पाज़ेब का क्या , महत्व ??

पुरुष होकर भी पाज़ेब से क्यों हैं इतना , ममत्व ??

.

कोई मामूली चाँदी की धातु नहीं , यह तो सबसे क़ीमती ,

प्रेम की पदयात्रा में चलते हुए , सबसे सुन्दर पलों की स्मृति ;

बुद्धि भूल प्रेम में , तुम जरा बुद्ध बन कर सोचना ,

पाज़ेब नहीं पाज़ेब में लिपटे प्रेम-भाव को परखना ;

.

ज्ञात हुआ…

प्रेम होने और प्रेम जताने में फ़र्क हैं ,

पाज़ेब लाने और पाज़ेब पहनाने का अपना मर्म हैं ;

सज्ज हैं जो प्रेम से , वो कितने गऊ सरल हैं ,

एक दूज़े से बिछड़ कर भी ,उनकी स्मृतियों में डूबे तरल हैं ;

उनकी स्मृतियों में डूबे तरल हैं…….❤ 

—Nimish 

01/11/19

पाज़ेब  means Anklets पायल

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38 thoughts on “पाज़ेब

    1. बहुत शुक्रिया भाई☺❤

      बस नाना जो बताए हम rhyme कर दिए…

      नाना जी के साथ और समय देना पड़ेगा …बहुत सही dude हैं😊😍🐵

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    1. हमे भी पसंद 😊

      पहनना नहीं पहनाना … सपनें में देखा था 🐒🐒

      Haha bahot sukriya पंख … और हैप्पी न्यू ईयर .. ☺💐

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      1. 😍☺😂 ना ना अभी कहाँ 🙂🌻 अभी अपुन बच्चे है…ये सब बाद की बातें है …Wishlist में हैं पर😋❤

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    1. I’m very emotional person friend that day I read your poem about ur mumma ….
      I’m sorry … whether I M right or wrong but I think my poem ” दूर कहाँ ” resonates with your feelings for your mumma .

      She is with you always …
      दूर कहा ??
      वह तो सबसे निकट हैं
      🙂
      This poem i dedicate to your mother
      🙏❤

      https://drnimish.wordpress.com/2019/11/27/%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81/

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    2. Thanks so much Perky ☺❤

      हिंदी ज्यादा पसंद है आजकल हिंदी में ही कोशिस कर रहा ….btw happy mew year😊💐✨

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      1. Happy Happy New Year Dear friend. Hope this Year you able to complete every resolution with your endeavours . May happiness and Love of your loved ones always encircles your life.😊

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  1. पाजेब अमूर्त बोल को मूर्त आकर देता था उनकी बात को वह समझ जाते है भले ही वह बाबूजी और बड़े भाई के साथ हो ,इस लिए दोनों को प्रेय थे ये पाजेब। साहब अब प्रेम की तहजीब नहीं अभिव्यक्ति में संकोच नहीं मर्यादा की वह दहलीज नहीं तो अब क्या करते पाजेब ? वह रुखसत हो चले संवेदनाओ से अब जरूर कहते है कोई आभूषण है पाजेब।।

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  2. दिल कक गहराईयों से— उम्दा लेखन।👌👌👌👌
    सिर पर घूँघट,लब खामोश,
    नजरों पर शर्म की पाबंदी मगर
    बहुत कुछ कह जाती है पाजेब,
    किसी के लिए मात्र आभूषण,
    किसी की धड़कन है पाजेब,
    भीड़ में हो या अकेले में,
    आंगन में हो या मेले में,
    प्रेम की सरगम,खुशियाँ या हो गम,
    सबकुछ कह जाती है पाजेब,
    सज्ज हैं जो प्रेम से ,
    वो कितने गऊ सरल हैं ,
    एक दूज़े से बिछड़ कर भी ,
    उनकी स्मृतियों में डूबे तरल हैं,
    अब ना वो पैर ना वो छमछम,
    फिर भी सुनाई देती है प्रेम की सरगम,
    मौन ही सही मगर
    बहुत कुछ कह देती है पाजेब,
    वो नही मगर उसके होने की अनुभूति है पाजेब।

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