भावुक़

Lockdown में रामायण देखा जा रहा 😃 कैसे पत्नीवियोग में श्री राम के ह्रदय की पीड़ा…. उनकी भावुकता और कैसे घास के तिनके को अस्त्र बना लंकेश्वर को चुनौती देती अपहरित माँ सीते …मज़बूत अडिग…सीता राम का अमर प्रेम बहुत कुछ कहता … क्यों😍😘कविता–

कहने को पुरुष मजबूत ,

स्त्रियाँ भावुक थोड़ी नाज़ुक होती ;

किन्तु एक स्त्री पुरुष के भावुक पक्ष ;

और एक पुरुष स्त्री के मज़बूत पक्ष से ;

सबसे अधिक आकर्षित होते ,

हाँ कुछ यूँ ही , इसी भाँति

प्रेम भाव उत्सर्जित होते….❤

—Nimish

There is no happiness greater than seeing your loved one happy

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11 thoughts on “भावुक़

  1. कोई है ऐसा जो इस दृश्य को देखा और रोया नही। बहुत ही खूबसूरत लिखा आपने।

    जंगल,जंगल भटकते,
    खग,मृग,पेड़,पौधों से भी
    अपनी सीता का पता पूछते,
    प्रेम का वियोग,अश्रुभरी आँखें,
    कैसे कहते,कठोर होते हैं पुरुष,
    उनकी आँखों में आँसू नही होते,
    अपनो के खोने पर पुरुष भी रोता है,
    यकीन नही तो देखो प्रभु श्रीराम को,
    पुरुष भी भावुक होता है।

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    1. वाह वाह मस्त एकदम

      अब पूरा ही लिख दो और अपने ब्लॉग में डालो daddu 😊

      सच में सभी रोये होंगे प्रभु श्री राम की पीड़ा देख☺❤

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    1. आँकड़े पसंद नहीं की गई ज्यादा …..ऐसा जनाई पड़ा 😃 सवाल पूछने और कमी बताने वाली कविताएं नहीं पसंद करते लोग 😍😍

      आप पढ़ लिये पिताजी पढ़ लिए बाकी अब वो delete हो गई 😁❤❤

      Thanks so much da☺❤

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      1. बेहतरीन कृति थी मगर। कैसे पसन्द नही आती। वैसे किसी के पसन्द करने से क्या मतलब!
        कभी कभी जो पसन्द करते हैं लोग वह उतना अच्छा नही होता जितना नापसन्द किया गया वस्तु।

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      2. डिलीट हो गया गलती से दादा😁 …कॉपी में लिखा हुआ है मेरे पास पर अब भी… डिजिटल वर्ल्ड पर ज्यादा भरोसा नहीं करना देखिये डिलीट हो गई 😍😃

        हां सही बात कह रहे ..हमे पसंद आई थी कविता ..पापा भी हामी भरे और आप भी पसंद किये ….दुनियादारी से कम मतलब ही रखना चाहीये

        खुद की और अपने अपनों की प्रसन्नता सिर आँखों पर ❤🙏✨

        प्रणाम दा …देखिये कोरोना जो उत्पात मचाया है ससुरी के कितने दिन हो गया जलेबी , कचौड़ी , समोसा पिज़्ज़ा खाये …. लस्सी पिए 😏😭😭😂😂

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