अनपढ़ प्रेमी

मेरी परदादी के दाहिने हाथ में एक tatoo था परदादा के नाम का …वे पढ़ी लिखी नहीं थी पर मुझे याद बचपन में पूछने पर बताती थी ये बाबा का नाम है ❤😃✨ 

प्रेम में ,

अनपढ़ भी गुदवा लेते है ;

अपने प्रेमी-प्रेमिका का नाम ,

दाहिनें हाथ या बाजूं पीठ पर ;

और सीख जाते है उसे पढ़ना !!

बड़ी सहजता से प्राप्त कर लेते है ;

ख़ुशी-ख़ुशी जीवन जी सकने की !!

मतलब भर की शिक्षा…❤

—-Nimish

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय.

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23 thoughts on “अनपढ़ प्रेमी

    1. Thanks so much friend❤

      यही दोहा inspiration थी कविता के पीछे ❤😃🙌

      दुष्यंत कुमार जी की पंक्ति याद आ रही आपने सुभद्रा कुमारी जी सुनाई थी एक दिन 😃🙌✨

      प्रेम के पल जीवन के सुंदरतम पल हैं
      जो किसी के इंतजार में गुजरते हैं
      कुछ भ्रमों को जीवन में पालकर
      बहुत प्यारे भ्रम!
      जीवन के श्रेष्ठ क्षणों के सूत्रधार
      और
      प्रेम के अर्थ को व्यर्थ होने से बचाने वाले वे निर्दोष से!

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  1. क्या खूब सोच है। बेहतरीन।

    किसी अंग पर गुदवाये वो चंद शब्द नही,
    बल्कि कभी नही मिटनेवाला,
    प्रियतम का नाम है,
    दुनियाँ कितनी बड़ी शायद नही मालूम,
    मगर ये शब्द उसकी पहचान है,
    सुना है अक्षर का ज्ञान ज्ञानी बनाता है,
    मगर ढाई अक्षर रब के समीप लाता है,
    जुदाई हो या मिलन,
    स्नेह के छलकते आँसू,
    कोई भी पूछता पति का नाम,
    शान से वह अंग उसकी ओर बढ़ते,
    अनगिनत बार उन शब्दों पर उंगलियों का जाना,
    उस प्रेम को मुश्किल शब्दों में बतलाना,
    अनपढ़ ही सही,
    माना अक्षर का ज्ञान नही,
    मगर उन शब्दों से वो अनजान नही,
    मगर उन शब्दों से वो अनजान नही।

    Liked by 2 people

    1. Pranshu है दो नामों का संधि विच्छेद 😆😃

      Thanks so much for your blessings ….stay safe take care …❤✨🚩

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