आँखें

तुम्हें पता , माँ कहतीं हैं !!

स्त्रियाँ , पुरुषों की आँखों में ,

अपनी एक नज़र मात्र से भांप लेती हैं ;

पुरुष-मन में खुद के लिए छिपा ,

प्रेम इज़्ज़त द्वेष या हवस ;

और शायद इसीलिए ,

मै उत्सुक़ हूं …यह जानने वश ,

मेरी प्रिय ,

तुमने मेरी आँखों में क्या पाया ??❤

—Nimish 

Words mean nothing, unless the eyes speak them too.🔥💫

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30 thoughts on “आँखें

    1. 💗💙💚💛💜💝🙏🙏🙏
      Thanks bhai …love n little bit of anger and lust also ..☺

      यों मैं कवि हूँ, आधुनिक हूँ, नया हूँ:
      काव्य-तत्त्व की खोज में कहाँ नहीं गया हूँ ?
      चाहता हूँ आप मुझे
      एक-एक शब्द पर सराहते हुए पढ़ें ।
      पर प्रतिमा–अरे, वह तो
      जैसी आप को रुचे आप स्वयं गढ़ें ।❤

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  1. पता नही पर्वत की चोटी पर जमी बर्फ कैसे पिघली,
    और कैसे उसे सहेज असंख्य पत्थरों,चट्टानों को
    लांघते,इठलाते,बलखाते,
    उन्मुक्त बहनेवाली
    मीठे जल की मलिका,
    निर्झरणी,
    सागर से जा मिली,
    कभी पूछना!
    कभी पूछना उसने
    उस खारे जल के बादशाह में क्या पाया।
    किसी के लिए चक्रधारी,
    किसी के लिए मुरलीधर,
    किसी के लिए माखनचोर,
    किसी के आराध्य
    तो किसी के लिए मात्र एक ग्वाला,
    हमें नही पता
    किसने तेरी आँखों मे क्या देखा,और क्या पाया,
    मगर मेरे लिए,
    मेरी ख्वाहिश,मेरी आदतें,
    तेरी आँखों की शरारतें,
    तेरी आँखों की शरारतें।

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    1. आय हाय क्या मस्त रोमांटिक आदमी हो आप daddu …एक नंबर लिखे हो ….

      तुम्हारा परिचय क्या दूं किसी से

      कहां से लाऊं वो उपमा, वो विशेषण

      मैं अल्पज्ञ, बस इतना कह पाता हूं

      कि, तुम जीवनतत्व की भांति हो

      तुम मेरी सबसे सुंदर कल्पना हो

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  2. पता नही पर्वत की चोटी पर जमी बर्फ कैसे पिघली,
    और कैसे उसे सहेज असंख्य पत्थरों,चट्टानों को
    लांघते,इठलाते,बलखाते,
    उन्मुक्त बहनेवाली
    मीठे जल की मलिका,
    निर्झरणी,
    सागर से जा मिली,
    कभी पूछना!
    कभी पूछना उसने
    उस खारे जल के बादशाह में क्या पाया।
    किसी के लिए चक्रधारी,
    किसी के लिए मुरलीधर,
    किसी के लिए माखनचोर,
    किसी के आराध्य
    तो किसी के लिए मात्र एक ग्वाला,
    हमें नही पता
    किसने तेरी आँखों मे क्या देखा,और क्या पाया,
    मगर मेरे लिए,
    मेरी ख्वाहिश,मेरी आदतें,
    तेरी आँखों की शरारतें,
    तेरी आँखों की शरारतें।

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  3. क्या बात है। इतना भी कहना ठीक नही। मैंने तो बस आपकी सुंदर रचना और सवाल का जवाब देने का प्रयास किया जो आपने अपने चाहनेवाले से पूछा था।

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    1. इसीलिए मै प्रणाम बोल देता हमेशा.☺..पर सच तो ये की ये जितना लेखन मैं सीख या लिख पाया उसके प्रेरणा स्त्रोत आप सभी ही है ..अपनी संगत में रखने के लिए शुक्रिया दा ❤✨

      तुलसी संगत साधु की हरे कोटि अपराध 🙏

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  4. सच है. आँखें मन का दर्पण होतीं हैं. पर कभी कभी धोखा भी देतीं हैं.
    जिससे तुमने प्रश्न पूछा, उसने जवाब दिया या नहीं?

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    1. Thanks so much dost

      नहीं …गुस्सा है मेरे से..बात नहीं करती …😃 उसके बताते ही मै आपको whatsapp करता ज़वाब दोस्त 😃😃❤💫

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