माँ

इक नन्हा नवसिखियां कवि मुझसा ,

जो लिखता कम , पढ़ता ज्यादा है ;

अपनी पहली दोचार कविताएं माँ को ही समर्पित करता है !!

ढूंढता फिरता हर क्षण

वो उपमा , वो विशेषण

वे शब्द श्रृंगार

जिससे मातृत्व भाव को अधिक खूबसूरत दिखलाया जाय ;

किन्तु ,भूल जाता है अनभिज्ञ ,

‘माँ’ शब्द ही पर्याप्त था !!

कविता में कुसुम खिलाने के लिए ;

.

हाँ माँ ,

मैं अल्पज्ञ, बस इतना कह पाता हूं ,

तुम जीवनतत्व की भांति हो ;

तुम दुनिया क़ी सबसे सुंदर कल्पना हो…❤

—–Nimish

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38 thoughts on “माँ

    1. मां,तेरे कदमों में सारा संसार
      करता हूं तुझसे मैं बेहद प्यार

      तू कहती हैं कि करती तू मुझसे प्यार लेकिन
      क्यों बोतल भरवाती फ्रिज में बार बार?😭😭😂😂❤

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      1. सच माँ जीवनतत्व है।
        कौन ऐसा शब्द
        जो उस शब्द की विशेषता बताए,
        खूबसूरत कविता।

        माँ, तूँ पास ना होकर भी समीप है,
        कैसे कहूँ तूँ कितना करीब है,
        जब भी कोई दुख होता,सह लेते,
        ये सोचकर कि तुम दूर हो
        मगर हो तो सही।
        माँ,
        पता है,
        आज मदर डे है
        तुझे याद करने का दिन!
        हमें नही पता ये दिन किसने बनाया,
        हमें ये भी नही पता,
        वो कौन सा क्षण जब मैं तुझे भूल बैठा!
        माँ,सबका मेरे जैसा तकदीर नही,
        कई ऐसे जिनकी माँ क्या,
        माँ की तस्वीर भी नही,
        समय बहुत बलवान,
        कभी हँसाती कभी रुलाती है,
        तेरी आवाज सुन लिया,
        फिर भी
        माँ !
        तुम याद बहुत आती है,
        तुम याद बहुत आती है।

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      2. धन्यवाद भाई जी। हमसबों के लिए तो सब दिन माता दिवस है और आज भी।
        आज हनक लिए विशेष हैं जो माँ को छोड़ आए अनाथालय में या माँ से मतलब ही नही। कम से कम आज तो याद कर लें। इंतजार कर रही होगी
        आंखों में नीर लिए,
        होठों पर आशीष लिए।

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      3. दुःखद व्यथा है उनकी … सोच कर भी रूह कांप जाये …..ऐसे लोग धन तो बहुत कमाते होंगे पर शांति , प्रेम के बिना मर जाते होंगे … मेरे लिए जिन्दा लाश ऐसे लोग 😞😞

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      4. जिस आँचल से धूल झाड़ती थी बेटे का,
        आज उसी आँचल में अपना आँसू छुपा रही है,
        किसी ने पूछ बैठा,
        माता जी
        क्या हुआ? कोई बीमार है या
        किसी अपने की मृत्यु हो गई,
        क्या हुआ जो आँसूं बहा रही है,
        वो औरत बोली,
        कुछ नही हुआ बेटा,
        बस पोते की याद सता रही है।

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      5. मार्मिक ☺

        घर में झीने रिश्ते
        मैंने लाखों बार उधड़ते देखे,
        चुपके-चुपके कर देती है
        जाने कब तुरपाई अम्मा.

        बाबूजी गुज़रे
        आपस में सब चीज़ें तक़्सीम हुईं,
        तब- मैं घर में सबसे छोटा था
        मेरे हिस्से आई अम्मा.

        —अलोक श्रीवास्तव 🌸❤

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      6. बचपन से आज तक तूने जो माँ को है पानी पिलाया , उसका हीं हिसाब बोतल भरवा कर माँ ने समझाया. 😂💕

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      1. ये मेरे लेखन से कमाई सबसे बड़ी पूँजी है ….आप सभी की blessings … ❤🌸🙏💫

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  1. निमीश, मैं अपने बच्चों से तेरे बारे में बताई। पूछे कि तुम कहाँ से हो। मैं ने कहा तुम यूपी के हो और एक डाक्टर भी हो। सही है न?

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    1. हाँ सब सही बस निमिष ग़लत लिखा 😄

      MBBS की पढाई अभी कर रहा माँ ❤🌸

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    2. प्रयागराज से हैं ….कुंभ में आना आप हमारे यहाँ ….काशी विश्वनाथ भी बग़ल में ….मै आप सभी को हर जगह के दर्शन करवा दूंगा 😃 प्रणाम

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      1. वाह। जरूर आऊँगी। हमारे परिवार के सदस्यों के साथ आने की योजना है।
        Thank you so much for your invitation.🤗

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  2. कविता करने की पहली और सबसे जरूरी शर्त ईमानदार अनुभूति है जो आपके पास है इसे ही पुराने आचार्यों ने प्रतिभा कहा है ! बाकी चीजें बेमानी हैं! बहोत ही सुंदर और ईमानदार कविता!

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    1. बहोत शुक्रिया दोस्त😃🌸❤

      ईश्वर कृपा से मेरे पास आप जैसे ईमानदार दोस्त और पाठक हैं …कविता लिख लेते आप सब का पढ़ सुन सीखकर 🌸

      Stay safe take care friend

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