स्वप्न पंछी

वो ना , बड़े सपने देखता कैसे सपने ?? फिल्मी पर्दे वाले ?? ना भई यथार्थ क़ी बीज से उत्पन्न हुए सपने तम की बेला में दीप लिए , जीवित सपने शिशु से कोमल , जरठ से प्रौढ़ सपने थोड़ा सा पाजीपन , थोड़ा प्रेमजाम पिएं सपने हां , अब कुछ सपने हक़ीक़त बनते कुछ [...]

निशा (haiku)

लाशों का ढ़ेर लाशों पर 'मत' खेल सियासी षंडत्व . निशा का तिरपाल मानव कृश बेहाल मृत्यु तांडव . शहर बसाया गाँव को क्यों लौटते भोले पांडव ----Nimish Stop criticizing the lockdown - it maybe because of the lockdown that you're alive to read Dr Pranshu poetries 😂😂 Hallelujah 🌸