स्वप्न पंछी

वो ना , बड़े सपने देखता

कैसे सपने ?? फिल्मी पर्दे वाले ?? ना भई

यथार्थ क़ी बीज से उत्पन्न हुए सपने

तम की बेला में दीप लिए , जीवित सपने

शिशु से कोमल , जरठ से प्रौढ़ सपने

थोड़ा सा पाजीपन , थोड़ा प्रेमजाम पिएं सपने

हां , अब कुछ सपने हक़ीक़त बनते

कुछ देर सही , आधे-अधूरे रह जाते

पर वह सपना सबसे निकट उसके

जिसमे पाता वह निज को

माँ की बिवाइयों में मोम लगाते हुए…

—-Nimish

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17 thoughts on “स्वप्न पंछी

  1. बहुत ही खूबसूरत रचना। वाक़ई दिल को छूती हुई।

    अब कुछ सपने हक़ीक़त बनते

    कुछ देर सही , आधे-अधूरे रह जाते

    पर वह सपना सबसे निकट उसके

    जिसमे पाता वह निज को

    माँ की बिवाइयों में मोम लगाते हुए…

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