क्या कुछ छूटा

देखिए !!

कुछ न कुछ छूटना तो अपेक्षित है

अखबार पढ़ा हमने तो प्राणायाम छूट गया

प्राणायाम किया तो अखबार छूट गया

दोनों किये तो नाश्ता छूट गया

जब सब जल्दी-जल्दी निपटाया तो

तो आनन्द छूट गया

मानें की

कुछ ना कुछ छूटना तो स्वाभाविक हैं

.

स्वस्थ भोजन खाया तो स्वाद छूटा

स्वाद का खाया तो स्वास्थ छूटा

जो जल्दी की तो सामान छूटा

जो ना की तो ट्रेन छूटा

जो दोनों ना छूटे तो

विदाई के वक़्त अम्मा का आलिंगन छूटा

मतलब यह कि

कुछ ना कुछ छूटना जीवन में अनुमोदित है

.

औरों का सोचा तो मन का छूटा

मन का चाहा तो रिश्ता टूटा

अध्ययन पर केंद्रित रहे तो प्रेमी रूठा

तरक्की आख़िर में पाई तब तक यौवन छूटा

हम तो कह रहे आरम्भ से

कुछ ना कुछ छूटना यही नियति है

😃❤😃❤😃❤😃❤😃❤😃❤

23 thoughts on “क्या कुछ छूटा

  1. क्या खूब कहा। कुछ ना कुछ छूटना ही नियति है। बेहतरीन भाई।

    ठहाकों के संग-संग गाल भी फुलाना,
    एक साथ दोनों क्या सम्भव कर पाना?
    सीढ़ियों से प्रेम और छत पर भी जाना,
    तुम ही बता क्या ये सम्भव हो पाना?

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    1. बोहोत आभार my friend😃❤😍🌼

      सीढ़ियों से प्रेम है
      और छत पर भी जाना है
      वसुधा की गोद में पलकर
      अम्बर का माथा चूम आना है

      Like

      1. निश्चित ही चूम लो
        जिसकी मर्जी मष्तक,
        देखना अम्बर से तुझे,
        मोह ना हो जाए कहीं,
        छूटना तो नियति है,
        अंत और प्रारब्ध भी,
        देखना वसुधा का तेरा,
        आँचल ना खो जाए कहीं।

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      2. गहरी बात …अलग अलग संदर्भ में पढ़ा जाए तो अलग-अलग भाव❤😊

        हँसते कवि कविराज
        भान हुई जब नव संज्ञा
        अम्बर माने अर्स
        फर्स को मानों वसुधा

        यद्यपि जीवन के सूत्र यार
        ऐसे ही टेढ़े उलझे है
        आगे बढ़ते कदम, एक जमीं में
        तो दूजा हवा में तैराने हैं

        हां, मुझको वसुधा प्यारी
        माँ के आँचल में दुलराता हूँ
        मुझको अम्बर भी प्यारा है
        पिता के स्वप्नों का भी लिए इरादा हूँ

        कहने को फर्स पर सुचिता
        अर्स पर बैठे काम-कुबेर
        मानव-पशु उर हो या मस्तक
        सबकी अपनी महिमा, अपना विवेक

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    1. 🌼😃😄❤

      कोई त्रुटि हुई हो तो इंगित कर सकते आप ….नवसिखिया थोड़े से 😁😍

      बोहोत आभार पढ़ने के लिए , प्रणाम❤

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  2. बहुत बढ़िया, हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता किसी को धरती तो किसी को आसमान नहीं मिलता ।

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    1. निदा फ़ाज़ली 😍😍❤

      बोहोत शुक्रिया दोस्त

      पूरा कर देते कंठस्थ है मुझे ये😄🌼❤

      जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
      ज़ुबां मिली है मगर हम-ज़ुबां नहीं मिलता

      बुझ सका है भला कौन वक्त के शोले
      ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता

      तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
      जहाँ उमीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता

      Liked by 1 person

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