शब्दों का खेल !!

मेरा मानना है - " शब्दों के आविष्कार के उपरान्त ही मनुष्य झूठा हो गया था  " , क्योकि आदमी /humans ही एक मात्र ऐसे जनावर है- जो शब्द बोल पाते , लिख पाते और उसे समझ पाते.......बाकी कोई जानवर कभी देखे हो ?? Calculas सॉल्व करते हुए ? अपनी प्रेमिका के लिए  lub लेटर लिखते [...]

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आपकी डॉक्टर बेटी !!

दिन रविवार था, एम्स की परीक्षा देकर मैं Noida मेट्रो में सवार दिल्ली लौट रहा था । खुश था...इसीलिए नहीं की exam बढ़िया गया था ,पर इसीलिए की करीब एक साल बाद घर जा रहा था...माँ के पास । सामने की सीट पर एक बुजुर्ग आदमी बैठे थे... कपडे मटमैले से, बाल बिखरे हुए , जूते [...]

‘बसंत’ आया क्या ??

परसाई जी कहते है --  ' बसंत आता नहीं , लाया जाता है   ' हमारा-आपका जीवन भी तो बिलकुल मौसम की भांति है -- कभी जिंदगी में बसंती हवाएं चलती है , तो कभी पतझड़ की बेला आती , कभी जिंदगी सावन के झूलो से सरपट हो जाती तो कभी जिंदगी बिलकुल बर्फ सी शांत,सफ़ेद चादर [...]

अनमोल बेटी अनमोल बाबा

कुछ यादें ऐसी होती है की सदा के लिए दिल-दिमाग में समा जाती है ..वैसे कोटा तो मै मेडिकल की तैयारी के लिए गया था ..या यू कह लीजिए मैं तो नासमझी के आकाश में समझ की पतंग उड़ाने सीखने गया था ,पर मेरा लेखक मन वहां अपने ही गुल खिला रहा था... कोचिंग जाते [...]

कौन जात हो भाई ??

अभी कुछ दिन पहले की बात है ...पापा की तबियत थोड़ी ख़राब होने की वजह से उन्होंने खुद न जाकर, मुझे अपने किसी मित्र के यहाँ निमंत्रण(invitation) पर भेज दिया ,मुझे नहीं पता था यह मित्र कौन है ,बस इतना पता था वोह फिजिक्स के टीचर है ,मन ही मन मै सोच रहा था आज [...]

जवाबदेही (व्यंग) 👍

आत्म-प्रवंचित बौनो का दरबार सजा हुआ था,उनका सरदार खुश था,हो भी क्यों ना प्रजा तो एक दूसरे पर कीचड़ उछालने में लगी थी,सरदार पर उंगली उठाने वाले या तो सरदार की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर चुके थे या फिर जनहित अस्पताल में अपनी उंगली का इलाज करवा रहे थे।।सरदार की चांदी थी,क्योंकि उसके विरोधी भी [...]

वैलेंटाइन (व्यंग) funny

वेलेंटाइन वीक में ये बात हमेशा उभर कर आती है की एक वर्ग जहां प्यार, मोहब्बत और साथ रहने के वादे करता है,अपने प्यार का इजहार करता है ,प्रेम-प्रसंग में लीन रहता है तो वहीं दूसरी ओर एक और वर्ग को इसी हफ्ते फौज में भर्ती होने की चुल मचती है। देश प्रेम भी आज [...]

अमीर कुत्ता (व्यंग) must read

मेरे माता पिता जी की हमेशा से यही वेदना थी कि मै सुबह जल्दी नहीं उठता,पर आजकल मै जल्दी उठने लगा हूं , कारण वो "अमीर कुत्ता" है ।वो रोज सुबह मेरे बालकनी के सामने से गुजरता है।दूर से देखने से ही पता चलता है कि वो किसी रईस घर का होगा,उसका "हैवी" शरीर,चलने का [...]