कभी तो तू भी मुझे समझ !!!

और कितना मैं तुझे लिखूं , कभी तो तू भी मुझे समझ ।। मेरी हर नादानियों को तू , इतना मत परख.. मत परख ..इतना मुझे की मै , दूर तुझसे हो जाऊ.. दिल तो दिल कही आँखों से भी , ओझल हो जाऊ.. . कहा-कहा नहीं खोजे थे ?? तूने , इश्क़-प्रेम के मायने [...]

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दुनिया ‘कुछ’ अजीब सी

हा हा , दुनिया कितनी अजीब सी है , दोस्त..... किसी की मुट्ठी खाली ,तो किसी को रखने की जगह कम है , कोई हिमालय सा शांत-अडिग ,तो कोई आग-बबूला दिनकर सा है । कोई धर्म का ज्ञाता यहाँ ,तो कोई नास्तिक बन मद-मस्त फिरे , कोई प्रेम में ' बुद्ध ' यहाँ ,तो कोई [...]

प्यास कैसे बुझाई जाए ??

मित्र..कैसे कोई जुुुगत लगाई जाए  ?? कैसे यह प्यास बुझाई जाए ?? संकट के बादल घिरते प्रतीत हो रहे , प्यासे चेहरे मायूस खड़े तक रहे ।। .. सूखते जा रहे कुएं  ,सूनसान हो रहे नल-कूप , प्यासे निराश पंछी...घटते हुए जन-जीव । सूखती हुई नदियाँ , सूखते हरे-भरे पेड़ , अमृतमय होने वाली 'पानी' की हर बूंद ।। [...]

ट्रेन का सफर (हास्य)

ट्रेन में बैठे हो कभी दोस्त ?? हम भी एक बार ट्रेन में चढ़े , चढ़े क्या.. चढ़ाए गए !! साथी दोस्तों के कन्धों पर सरकाए गए । सोचा था तान कर चादर सोएंगे आज सीट पर , पर लोगों को खड़ा देख, सीट पर बैठाये उन्हें ।। . जो जागे रहे तो--भांति भांति के [...]

वो चार लोग !!

फिर रुक गए पाँव,सोच कर  वोह क्या सोचेंगे !! कितने ही सपने मार दिए, खुद के  वोह क्या बोलेंगे !! जाना था किस ओर हमे, किस ओर चल दिए !! दिल में थे जो ख्वाब, भुला कर बाजू को मुड़ गए !! मन में जो उठते थे ,ज्वार ..बहुत उन्हें मन में ही दबाया !! [...]

तारीख़

तारीखों का क्या हैं ... वोह तो बदल रही पल-पल । आज समय जो बीत रहा , फिर क्या आयेगा लौट कर कल?? खुद को ना बांधो प्रियवर ,तुम इन तारीखों के इस जंजाल में । मत खो जाओ कल क्या हुआ था , कल क्या होने वाला के , विचार में । . सब [...]

नीम का पेड़

फिर लौटा अपने गांव मैं  , वापस उस पेड़ की छाँव में । फिर उसी खेत ख़ालियानो में , वापस लौटा उन बगियो में ।। जहाँ उस नन्हें पौधे को रोपा था , पानी-पोषण देकर सँजोया था । वह पेड़ नीम का बड़ा हुआ , हरी जटायें बिखराए खड़ा हुआ ।। पर दिनकर का क्रोध चरम पर [...]

भीड़ से अलग !!

है भीड़ बहुत इस दुनिया मे , कैसे मै इसमें खो जाऊ ?? आँखों पर पट्टी बाँध कर , कैसे यु ही घुल मिल जाऊ ।। है भीड़ का न चेहरा कोई , ना ही तय है कोई दिशा सजग । दिखते है बस अतरंगी चेहरे , और अंत में मचनी है भगदड़ ।। कैसे [...]

मुमकिन है !!

सीखने की चाह हो ,तो क्या मुमकिन नहीं ? अकड़ की जगह झुकाव हो ,तो हर राह आसान बनी ।। दुर्गम से दुर्गम रास्ते , बन जाते है सुहावने , दिल में हो जज्बा ,साफ़ नियत ,सपनो के पीछे दीवाने ।। . नफरत के बीज नहीं बोना ,प्यार के फूल खिलाओ तुम , जब खुद [...]

मां,पापा और मै(हास्य कविता)😁

मां बोली बेटा अब उठ जा , सूरज कब का है निकला ।। उठ जा बेटा अब बहुत हुआ , क्यों तोड़ रहा खुद के रिकॉर्ड ।। दुनिया देख, आगे बढ़ती जाती , और तू बिस्तर से है अबतक चिपका ।। बस कर अब तू,अंधेर ना कर , रातों में क्यों जगता है तू ।। [...]

बारिश 😀

सुनो पंडिताइन, मुझे पता हैं तुम्हें बारिश बहुत पसंद हैं तो मैँ सोचता हु बारिश हो और तुम भीग जाओ लेकिन जुकाम होने से पहले ,मैं बना दूं अदरक तुलसी वाली चाय ताकि तुम उसे ग्रहण कर सुरक्षित हो जाओ। बाई गॉड की क़सम .... Caution😜 बाते बचकानी है इसीलिए लॉजिक धूड़ने का प्रयास ना [...]

कैसी कविता लिखूं??

सोचता हूं कैसी कविता लिखूं? कविता जो,शब्दों में उलझी हो , या जो सरल,रास और मीठी हो ।। कविता जो मेरी मां जैसी प्यारी हो , या जो पिता की तरह अनुशासित हो ।। कविता जो काशी की गलियों सी भा जाए , या वोह जिसमें अपना दिल रो जाए ।। कविता जो सफलता की [...]

आस…

बेहतरीन कविता … Well done Jyoti…
Do follow her friends… amazing writer 👍

Jeevan Jyoti

परिंदे बेवज़ह गगन को चूमा नहीं करते,

जुनून कुछ कर गुज़रने का, उन्हें ऊँचा उड़ता है।

फ़लसफ़ा है ये जीवन का, इसे दिल से जियो यारों,

बिना ख़्वाहिश के जीवन को, कभी सज़दा नहीं करते।

दिलों में रौशनी भर कर, एक मीठी आस बाकी रख,

जो दिन गुज़रा वो बीता कल, जो आएगा वो बेहतर।

जीवन के ख़जाने से ,लुटा खुशियां जमाने को,

बिना खुशियों के जीवन को, कभी जीना नहीं कहते।

है कोई दास्तां ऐसी, न जिसमें दर्द शामिल हो,

किसी का यार छूटा है,किसी का प्यार छूटा है,

किसी की जिंदगी में,उसकी कोई सोच नहीं शामिल।

पर जीवन तो निरंतर है,फिर दिल की आस क्यों छूटे।

‘ये’ होता तो अच्छा था, ‘ वो ‘ होता तो अच्छा था,

मैं ‘वो’ कर नहीं पाया ,अगर करता तो अच्छा था।

कभी उनको भी तो देखो,जिन्हें कुछ भी नहीं हासिल,

कभी मायूस होकर जीवन से रुसवा नहीं होते।

ज़िन्दगी एक इबादत…

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दो तरह के शेर!!

एक शेर जंगल का राजा, खूंखार ,घूमे आवारा ।। जंगल में भय कायम रखे , जीव जन्तु सब कापे उससे ।। है राजा ,पर खुद शिकार पर , कड़ी मशककत ,पर मिलता कुछ ।। हर दिन घंटों ताक लगाए, मुश्किल से कोई हाथ में आए ।। कभी कभी मायूस भी रह जाए, पर जंगल का [...]

है नमन !!

ओ निष्ठुर,कायर, दहसतगर्दो , सामने से लड़ना तुम क्या जानो ।। ओ जिहाद से उपजे दुरजनो , राम-अली तुम क्या मानो ।। ओ बैठे भीतर जयचंदो , उसका प्रताप तुम क्या जानोगे ।। ओ कपटी ,धूसर , निरलजो , उसका यश , ओज तुम क्या मानोगे ।। हिमालय भी नत मकसत जिसपर , धरती मां [...]