प्रेम में पड़ी स्त्री

प्रेम में पड़ी स्त्री अबोध शिशु के समान होती है पहचानती है बस स्नेह की भाषा पलटती है केवल लाड़ की लिपि पर सूंघ लेती है गंध पवित्र भावनाओं की मचलती है सुनकर प्रेमी की आवाज़ ईश्वर स्वयं बचाते हैं प्रतिपल नासमझ को प्रेम में डूबी स्त्री ईश्वर की गोद में खेलती है ~ डॉ० रुपाली [...]

चीनी चाय पीते हुए (अज्ञेय)

चाय पीते हुए... मैं अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ। आपने कभी चाय पीते हुए पिता के बारे में सोचा है? अच्छी बात नहीं है पिताओं के बारे में सोचना। अपनी कलई खुल जाती है। हम कुछ दूसरे हो सकते थे। पर सोच की कठिनाई यह है कि दिखा देता है कि हम [...]