How Much You Mean To Me

I write poems about beauty , Your name is on every line. And how your pretty little fingers , Were made to perfectly fit into mine. . I write songs about perfection , Your name echoes all through. And how this hellish life on earth , Seems so heavenly with you. . I try to form perfect rhymes, But [...]

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अनमोल बेटी अनमोल बाबा

कुछ यादें ऐसी होती है की सदा के लिए दिल-दिमाग में समा जाती है ..वैसे कोटा तो मै मेडिकल की तैयारी के लिए गया था ..या यू कह लीजिए मैं तो नासमझी के आकाश में समझ की पतंग उड़ाने सीखने गया था ,पर मेरा लेखक मन वहां अपने ही गुल खिला रहा था... कोचिंग जाते [...]

ट्रेन का सफर (हास्य)

ट्रेन में बैठे हो कभी दोस्त ?? हम भी एक बार ट्रेन में चढ़े , चढ़े क्या.. चढ़ाए गए !! साथी दोस्तों के कन्धों पर सरकाए गए । सोचा था तान कर चादर सोएंगे आज सीट पर , पर लोगों को खड़ा देख, सीट पर बैठाये उन्हें ।। . जो जागे रहे तो--भांति भांति के [...]

Veronica

Their voice so harmonious, Silent when no strings attached, Smooth is their texture, Admiring their beauty with fingers, You seat them on your lap, Putting their arms around your shoulder. Tickle them hard to make them peck, They touch your heart with their sound, Nibbling your ears in between, The motion generates friction, Friction generates [...]

वो चार लोग !!

फिर रुक गए पाँव,सोच कर  वोह क्या सोचेंगे !! कितने ही सपने मार दिए, खुद के  वोह क्या बोलेंगे !! जाना था किस ओर हमे, किस ओर चल दिए !! दिल में थे जो ख्वाब, भुला कर बाजू को मुड़ गए !! मन में जो उठते थे ,ज्वार ..बहुत उन्हें मन में ही दबाया !! [...]

Smile

I saw a girl once and she just gave me a smile but that was enough. I was having a very bad day and I felt like crying. I was coming back from my coaching classes and that's when I saw her. She was completely normal, there was nothing really special about her. Not the hair, clothes [...]

तारीख़

तारीखों का क्या हैं ... वोह तो बदल रही पल-पल । आज समय जो बीत रहा , फिर क्या आयेगा लौट कर कल?? खुद को ना बांधो प्रियवर ,तुम इन तारीखों के इस जंजाल में । मत खो जाओ कल क्या हुआ था , कल क्या होने वाला के , विचार में । . सब [...]

नीम का पेड़

फिर लौटा अपने गांव मैं  , वापस उस पेड़ की छाँव में । फिर उसी खेत ख़ालियानो में , वापस लौटा उन बगियो में ।। जहाँ उस नन्हें पौधे को रोपा था , पानी-पोषण देकर सँजोया था । वह पेड़ नीम का बड़ा हुआ , हरी जटायें बिखराए खड़ा हुआ ।। पर दिनकर का क्रोध चरम पर [...]

भीड़ से अलग !!

है भीड़ बहुत इस दुनिया मे , कैसे मै इसमें खो जाऊ ?? आँखों पर पट्टी बाँध कर , कैसे यु ही घुल मिल जाऊ ।। है भीड़ का न चेहरा कोई , ना ही तय है कोई दिशा सजग । दिखते है बस अतरंगी चेहरे , और अंत में मचनी है भगदड़ ।। कैसे [...]