चित्रकार

क़ाश मैं चित्रकार या कोई रंगसाज होता... फिर जब कभी-भी तुम उदास होती , तुम्हे सामने बिठाकर , मैं तुम्हारी  खिलखिलाती हुई तस्वीर बना देता ! तुम्हारे मुरझुराए जूड़े में एक गुलाब टाँक देता...अपने ब्रश से ! हां  तुम्हारी चाँद जैसी आँखों में , तनिक शरारत भर देता ! तुमसे कितनी बार कहा है उदास [...]