सजग रहना पहरेदार

अमावस की रात बीती , किन्तु पूनम का चाँद उगना शेष है ! शत्रु जरूर है लहूलुहान , परन्तु मन में भरे घोर मलिनता द्वेष है  !! . नापाक है पड़ोसी , नापाक इरादों से सन्नद्ध ! आतंक के स्त्रोत से , अमन की अपेक्षा हास्यस्पद  !! . 'घर के भेदी' भी असंख्य , जयचंद [...]

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ऐतिहासिक भूल-सुधार !!

अभ्यन्तर में भड़काओ नव ज्वाला , घोर तम में फैले उँजियारा । बंजर भूमि में उगे नव अंकुरित बीज , एक निमिष भी न रहने पाए कलंकित रीत ।। . शस्य श्यामला स्वर्ण भूमि का , लौटे गौरव मान पुनः ... श्रापित तीन सौ सत्तरवीं धारा का , अंत तुरंत सुनिश्चित हो !!! . कीमत [...]