शब्दों का खेल !!

मेरा मानना है - " शब्दों के आविष्कार के उपरान्त ही मनुष्य झूठा हो गया था  " , क्योकि आदमी /humans ही एक मात्र ऐसे जनावर है- जो शब्द बोल पाते , लिख पाते और उसे समझ पाते.......बाकी कोई जानवर कभी देखे हो ?? Calculas सॉल्व करते हुए ? अपनी प्रेमिका के लिए  lub लेटर लिखते [...]

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आपकी डॉक्टर बेटी !!

दिन रविवार था, एम्स की परीक्षा देकर मैं Noida मेट्रो में सवार दिल्ली लौट रहा था । खुश था...इसीलिए नहीं की exam बढ़िया गया था ,पर इसीलिए की करीब एक साल बाद घर जा रहा था...माँ के पास । सामने की सीट पर एक बुजुर्ग आदमी बैठे थे... कपडे मटमैले से, बाल बिखरे हुए , जूते [...]

‘बसंत’ आया क्या ??

परसाई जी कहते है --  ' बसंत आता नहीं , लाया जाता है   ' हमारा-आपका जीवन भी तो बिलकुल मौसम की भांति है -- कभी जिंदगी में बसंती हवाएं चलती है , तो कभी पतझड़ की बेला आती , कभी जिंदगी सावन के झूलो से सरपट हो जाती तो कभी जिंदगी बिलकुल बर्फ सी शांत,सफ़ेद चादर [...]

दुनिया ‘कुछ’ अजीब सी

हा हा , दुनिया कितनी अजीब सी है , दोस्त..... किसी की मुट्ठी खाली ,तो किसी को रखने की जगह कम है , कोई हिमालय सा शांत-अडिग ,तो कोई आग-बबूला दिनकर सा है । कोई धर्म का ज्ञाता यहाँ ,तो कोई नास्तिक बन मद-मस्त फिरे , कोई प्रेम में ' बुद्ध ' यहाँ ,तो कोई [...]

ट्रेन का सफर (हास्य)

ट्रेन में बैठे हो कभी दोस्त ?? हम भी एक बार ट्रेन में चढ़े , चढ़े क्या.. चढ़ाए गए !! साथी दोस्तों के कन्धों पर सरकाए गए । सोचा था तान कर चादर सोएंगे आज सीट पर , पर लोगों को खड़ा देख, सीट पर बैठाये उन्हें ।। . जो जागे रहे तो--भांति भांति के [...]

तारीख़

तारीखों का क्या हैं ... वोह तो बदल रही पल-पल । आज समय जो बीत रहा , फिर क्या आयेगा लौट कर कल?? खुद को ना बांधो प्रियवर ,तुम इन तारीखों के इस जंजाल में । मत खो जाओ कल क्या हुआ था , कल क्या होने वाला के , विचार में । . सब [...]