प्रतीक्षा

क़ाश ये पल जल्द गुज़रे , छटे चांदनी रात , सूर्य पुनः निकले ; एक-एक क्षण अब अर्सो-सा लगता , चंद महीनों का साथ जन्मों-का लगता ; . कर हिम्मत कह डाला - हैं प्रेम तुझसे , शरमा गई , बोली 'कल' बतलाती तुम्हें ; उसका 'कल' मुझे आज से ही व्यग्र रखता हैं , [...]