चित्रकार

क़ाश मैं चित्रकार या कोई रंगसाज होता... फिर जब कभी-भी तुम उदास होती , तुम्हे सामने बिठाकर , मैं तुम्हारी  खिलखिलाती हुई तस्वीर बना देता ! तुम्हारे मुरझुराए जूड़े में एक गुलाब टाँक देता...अपने ब्रश से ! हां  तुम्हारी चाँद जैसी आँखों में , तनिक शरारत भर देता ! तुमसे कितनी बार कहा है उदास [...]

सिर्फ हमारी !!

तुम्हें जिया है मैंने , हर-पल , हर-कण में ; कविताओं के हर शब्द में , हर एक ख्वाहिश के साथ , हर एक तमन्ना , हर एक सपनें के साथ , जैसा मैं चाहता हूँ ; मैंने ठीक वैसी ही , दुनिया बनायी है , तुम्हारे साथ , मेरी और तुम्हारीं , सिर्फ हमारी....❤ [...]