ऐतिहासिक भूल-सुधार !!

अभ्यन्तर में भड़काओ नव ज्वाला , घोर तम में फैले उँजियारा । बंजर भूमि में उगे नव अंकुरित बीज , एक निमिष भी न रहने पाए कलंकित रीत ।। . शस्य श्यामला स्वर्ण भूमि का , लौटे गौरव मान पुनः ... श्रापित तीन सौ सत्तरवीं धारा का , अंत तुरंत सुनिश्चित हो !!! . कीमत [...]

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