माँ

इक नन्हा नवसिखियां कवि मुझसा , जो लिखता कम , पढ़ता ज्यादा है ; अपनी पहली दोचार कविताएं माँ को ही समर्पित करता है !! ढूंढता फिरता हर क्षण वो उपमा , वो विशेषण वे शब्द श्रृंगार जिससे मातृत्व भाव को अधिक खूबसूरत दिखलाया जाय ; किन्तु ,भूल जाता है अनभिज्ञ , 'माँ' शब्द ही [...]