स्वप्न पंछी

वो ना , बड़े सपने देखता कैसे सपने ?? फिल्मी पर्दे वाले ?? ना भई यथार्थ क़ी बीज से उत्पन्न हुए सपने तम की बेला में दीप लिए , जीवित सपने शिशु से कोमल , जरठ से प्रौढ़ सपने थोड़ा सा पाजीपन , थोड़ा प्रेमजाम पिएं सपने हां , अब कुछ सपने हक़ीक़त बनते कुछ [...]

माँ

इक नन्हा नवसिखियां कवि मुझसा , जो लिखता कम , पढ़ता ज्यादा है ; अपनी पहली दोचार कविताएं माँ को ही समर्पित करता है !! ढूंढता फिरता हर क्षण वो उपमा , वो विशेषण वे शब्द श्रृंगार जिससे मातृत्व भाव को अधिक खूबसूरत दिखलाया जाय ; किन्तु ,भूल जाता है अनभिज्ञ , 'माँ' शब्द ही [...]

हारमोनियम

Lockdown में हारमोनियम पर धावा बोला गया है...बजाना आता तो नहीं था पहले ...पर पहले तो कुछ भी नहीं आता था..परसाई जी कहते है "बसंत आता नहीं ...लाया जाता हैं" ❤✨😃 सात स्वरों का मैं हूँ राजा , नाम मेरा हारमोनियम उर्फ़ बाजा ; संगीतकार को रियाज़ करवाऊँ, नए गीत की धुन मैं रचवाऊँ ; [...]

ख़ीर

कभी कभी मै सोचता ये दिनभर दुःख , नकारात्मकता और रोने वाली बातें ही क्यों ढूंढ़ी जाए ...अरे भई खुशिया भी तो ढूंढ सकते ...खुशिया बना सकते ... परोस सकते ...क्यों ???☺  ख़ीर 😉 माँ का अनुपम प्रखर प्यार , गुमसुम हूँ मै ,पढ़ लेती आनन* हर इक राज ! घोर निशा का पहरा , [...]