सजग रहना पहरेदार

अमावस की रात बीती , किन्तु पूनम का चाँद उगना शेष है ! शत्रु जरूर है लहूलुहान , परन्तु मन में भरे घोर मलिनता द्वेष है  !! . नापाक है पड़ोसी , नापाक इरादों से सन्नद्ध ! आतंक के स्त्रोत से , अमन की अपेक्षा हास्यस्पद  !! . 'घर के भेदी' भी असंख्य , जयचंद [...]

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