नीम का पेड़

फिर लौटा अपने गांव मैं  , वापस उस पेड़ की छाँव में । फिर उसी खेत ख़ालियानो में , वापस लौटा उन बगियो में ।। जहाँ उस नन्हें पौधे को रोपा था , पानी-पोषण देकर सँजोया था । वह पेड़ नीम का बड़ा हुआ , हरी जटायें बिखराए खड़ा हुआ ।। पर दिनकर का क्रोध चरम पर [...]

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