कला जोड़ती है

जब बड़े परदे पर 'बच्चन' आता है और कहता है " नाम है शहंशाह ", तो भीड़ का चेहरा अचानक खिल उठता है , लोग भूल जाते है... भूल जाते है - हार घरबार , निराशा अभिलाषा , पाप विलाप , लोभ छोभ और सब कुछ भूल-भुलाकर चंद घंटे उस कला , उस चलचित्र का [...]

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