ध्यान !

कितना सहज है..  ध्यान की मुद्रा में आना  ; और कितना जटिल है .. वास्तव में ध्यान लग पाना ; स्पष्ट हैं... सीधी रीढ़ मात्र से , मन के टेढ़ेपन से निजात दुष्कर है ; अंतर्मन में व्याप्त कोलाहल रुपी विष  , कृत्रिम शांति पर अपकर्ष है !!! ----Nimish The life of inner peace, being harmonious and [...]

दो तरह के शेर

एक शेर जंगल का राजा , खूंखार ,घूमे आवारा  ! जंगल में भय कायम रखे , जीव जन्तु सब कापे उससे ! है राजा ,पर खुद शिकार पर , कड़ी मशककत ,पर मिलता कुछ  ! हर दिन घंटों ताक लगाए , मुश्किल से कोई हाथ में आए ! कभी कभी मायूस भी रह जाए, पर [...]