है नमन !!

ओ निष्ठुर,कायर, दहसतगर्दो , सामने से लड़ना तुम क्या जानो ।। ओ जिहाद से उपजे दुरजनो , राम-अली तुम क्या मानो ।। ओ बैठे भीतर जयचंदो , उसका प्रताप तुम क्या जानोगे ।। ओ कपटी ,धूसर , निरलजो , उसका यश , ओज तुम क्या मानोगे ।। हिमालय भी नत मकसत जिसपर , धरती मां [...]

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