दूर कहाँ ??

दूर कहाँ ?? तुम तो मेरे सबसे समीप हो विकट से विकट छणों में सबसे निकट हो हाँ , अब तुम मेरी निकटता पर संशय कर सकते किसी तीसरे का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकते अनुपात , क्षेत्रफल , वेग आदि गणितीय दूरी माप सकते एक-दूजे की नजदीकियों पर प्रशनचिन्ह लग सकते पर सत्य बड़ा सात्विक [...]

सिर्फ शब्दों से नहीं..

सिर्फ शब्दों से नहीं , बिना छुए उसे स्पर्श कर.. बिना चूमे उसे चूमकर.. बिना घेरे उसे बाँहों में घेरकर.. . सूरजमुखी-सा शरमाते हुए... दूर से उसे पँखुड़ी-पँखुड़ी निहारते हुए... बिना देखे उसे दृश्य करते हुए... मैंने उससे कहा... ❤ ---Nimish