ख़ीर

कभी कभी मै सोचता ये दिनभर दुःख , नकारात्मकता और रोने वाली बातें ही क्यों ढूंढ़ी जाए ...अरे भई खुशिया भी तो ढूंढ सकते ...खुशिया बना सकते ... परोस सकते ...क्यों ???☺  ख़ीर 😉 माँ का अनुपम प्रखर प्यार , गुमसुम हूँ मै ,पढ़ लेती आनन* हर इक राज ! घोर निशा का पहरा , [...]

पॉलिटिक्स वगैरा

वैसे हम राजनीति पॉलिटिक्स इन सब से कोसों दूर रहना चाहते , पिता जी भी आये दिन सुनाते रहते - खाओ कमाओ ई राजनीति नेतागिरी से बाहर ही रहो गोबर गणेश !! पर मन कहा मानता , कभी-कभी सोचता हूँ कि  आदर्श , मूल्य , सिद्धांत वगैरा सोने का गहना है रोज पहनने की चीज [...]