ध्यान !

कितना सहज है..  ध्यान की मुद्रा में आना  ; और कितना जटिल है .. वास्तव में ध्यान लग पाना ; स्पष्ट हैं... सीधी रीढ़ मात्र से , मन के टेढ़ेपन से निजात दुष्कर है ; अंतर्मन में व्याप्त कोलाहल रुपी विष  , कृत्रिम शांति पर अपकर्ष है !!! ----Nimish The life of inner peace, being harmonious and [...]

Promises💕

Promises we have made, Kept, we have none, Why do we have to make, Promises anymore? Remember those magical days, When the promise of togetherness, Held us together, tentatively, Alas! No more! Years just flow by, As water beneath bridges, Gathering speed towards, The great sea of immortality. There you and I, Will rest our [...]

दो तरह के शेर

एक शेर जंगल का राजा , खूंखार ,घूमे आवारा  ! जंगल में भय कायम रखे , जीव जन्तु सब कापे उससे ! है राजा ,पर खुद शिकार पर , कड़ी मशककत ,पर मिलता कुछ  ! हर दिन घंटों ताक लगाए , मुश्किल से कोई हाथ में आए ! कभी कभी मायूस भी रह जाए, पर [...]

दूर कहाँ ??

दूर कहाँ ?? तुम तो मेरे सबसे समीप हो विकट से विकट छणों में सबसे निकट हो हाँ , अब तुम मेरी निकटता पर संशय कर सकते किसी तीसरे का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकते अनुपात , क्षेत्रफल , वेग आदि गणितीय दूरी माप सकते एक-दूजे की नजदीकियों पर प्रशनचिन्ह लग सकते पर सत्य बड़ा सात्विक [...]

पॉलिटिक्स वगैरा

वैसे हम राजनीति पॉलिटिक्स इन सब से कोसों दूर रहना चाहते , पिता जी भी आये दिन सुनाते रहते - खाओ कमाओ ई राजनीति नेतागिरी से बाहर ही रहो गोबर गणेश !! पर मन कहा मानता , कभी-कभी सोचता हूँ कि  आदर्श , मूल्य , सिद्धांत वगैरा सोने का गहना है रोज पहनने की चीज [...]

सिर्फ शब्दों से नहीं..

सिर्फ शब्दों से नहीं , बिना छुए उसे स्पर्श कर.. बिना चूमे उसे चूमकर.. बिना घेरे उसे बाँहों में घेरकर.. . सूरजमुखी-सा शरमाते हुए... दूर से उसे पँखुड़ी-पँखुड़ी निहारते हुए... बिना देखे उसे दृश्य करते हुए... मैंने उससे कहा... ❤ ---Nimish  

जरुरी है ??

कभी-कभार मै सोचने लगता हूँ  ...क्या सफल होना जरुरी है ?? श्रेष्ठ बनना अनिवार्य है ??   हाँ या ना , पता नहीं !! पर शिखर तक ना भी पहुंचे हों , पर सशक्त होना जरुरी है ! बातें , मग से हो या न हो , पग धरातल पर जरुरी है ! दुरूहता कितनी भी [...]