व्योम

दो दूनी चार , दो तिहाई छह , स्लेट पर चॉक घिसता , भू पर पलथी मारकर बैठा , वह बालक , नहीं देखता आलिसां भवन , मोटी कमाई ; शान-शौक़त और अफ़सर बनने के सपने ; वह तो घंटी बजने और घर लौट , माँ के हाथ से दूध-भात ; बाबा के कंधे पर [...]