गुड़िया

आपने कभी देखा है किसी छोटी बच्ची को गुड्डे-गुड़िया Doll , Barbie doll से खेलते हुए ...कभी देखिएगा एक गुड़िया और उस बच्ची में मेल ❤ कविता-- बच्चियाँ !! हाँ , छोटी बच्चियाँ , कैसे बच्चियाँ स्नेह का प्रतिबिम्ब बन जाती है ; . कैसे वे अपने गुड्डे-गुड़ियों के , केश संवारती है , रूप [...]

प्रेम और स्त्री

प्रेम में पड़ी , स्त्री सब कुछ सहती है ; सींचती हैं प्रेम रुपी पौधें को , अपने नेत्रजल से ; प्रतिपल बचाती है.. निज़ प्रेम को , हर व्याध , हर एक अंधड़ से ; सँजो कर रखती हैैं खुद में उसे , मानों कोई कस्तूरी मृग में ; प्रेम में पड़ी स्त्री बिलकुल [...]

उलटे पाँव

घर पर बंद पड़ा आदमी , निहारता है दीवार, अपने दादा-परदादा की स्मृतियों क़ो ; सिर पर हाँथ फ़ेर मुस्काता हैं , अपनी प्रेमिका को लिखें पुराने प्रेम पत्र पढ़कर ; खोज़ निकालता हैं , अपने पुराने खिलौने चीज़-समानों को ; लजाता हैं , स्वयं की किसी पुरानी तस्वीर देख कर ; जिंदगी की भागदौड़ [...]

चित्रकार

क़ाश मैं चित्रकार या कोई रंगसाज होता... फिर जब कभी-भी तुम उदास होती , तुम्हे सामने बिठाकर , मैं तुम्हारी  खिलखिलाती हुई तस्वीर बना देता ! तुम्हारे मुरझुराए जूड़े में एक गुलाब टाँक देता...अपने ब्रश से ! हां  तुम्हारी चाँद जैसी आँखों में , तनिक शरारत भर देता ! तुमसे कितनी बार कहा है उदास [...]

विश्वास

क्यों ढूँढती हो सच्चाई , जब सच्चा दिल तुम लिये हुए हो !! विश्वास से भरा दिल हम लिए हुए हैं !! ज़माना देखेगा अब , सीखेगा अब.. कि सच्चाई और विश्वास से रुहानीं रिश्तें कैसे बनकर जुड़ते हैं.. कभी ना टुटनें के लिए ---निमिष

पॉलिटिक्स वगैरा

वैसे हम राजनीति पॉलिटिक्स इन सब से कोसों दूर रहना चाहते , पिता जी भी आये दिन सुनाते रहते - खाओ कमाओ ई राजनीति नेतागिरी से बाहर ही रहो गोबर गणेश !! पर मन कहा मानता , कभी-कभी सोचता हूँ कि  आदर्श , मूल्य , सिद्धांत वगैरा सोने का गहना है रोज पहनने की चीज [...]

जरुरी है ??

कभी-कभार मै सोचने लगता हूँ  ...क्या सफल होना जरुरी है ?? श्रेष्ठ बनना अनिवार्य है ??   हाँ या ना , पता नहीं !! पर शिखर तक ना भी पहुंचे हों , पर सशक्त होना जरुरी है ! बातें , मग से हो या न हो , पग धरातल पर जरुरी है ! दुरूहता कितनी भी [...]